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क्या Dual N-Back काम करता है? रिसर्च क्या कहती है

हाँ, dual n-back काम करता है, लेकिन उसी चीज़ के लिए जिसकी यह ट्रेनिंग देता है: आप n-back में काफ़ी बेहतर हो जाते हैं और मिलते-जुलते वर्किंग मेमोरी टास्क में थोड़े बेहतर। IQ बढ़ने के दावे कमज़ोर हैं। सबसे जानी-मानी मेटा-एनालिसिस में औसतन लगभग 3 से 4 IQ पॉइंट मिले, और एक्टिव कंट्रोल ग्रुप वाली स्टडीज़ में लगभग शून्य।

Dual n-back क्या है?

Dual n-back वर्किंग मेमोरी का एक टास्क है जिसमें एक साथ दो स्ट्रीम चलती हैं। हर स्टेप पर ग्रिड में एक स्क्वेयर जलता है और आप एक अक्षर देखते या सुनते हैं। जब पोज़िशन या अक्षर N स्टेप पहले वाले से मेल खाता है, तब आपको जवाब देना होता है।

2-back पर आप हर नए स्क्वेयर और अक्षर की तुलना दो स्टेप पहले वालों से करते हैं, फिर दिमाग में रखी जानकारी को अपडेट करते हैं। तुलना और अपडेट का यही लगातार चलने वाला चक्र इस टास्क को मुश्किल बनाता है। आप इसे हमारे dual n-back टेस्ट पर मुफ़्त आज़मा सकते हैं, जिसमें 1-, 2- और 3-back लेवल हैं और हर राउंड लगभग एक मिनट का है।

n-back टास्क कहाँ से आया?

Wayne Kirchner ने 1958 में शॉर्ट-टर्म मेमोरी का अध्ययन करने के लिए n-back टास्क पेश किया। Journal of Experimental Psychology में छपे उनके पेपर में "तेज़ी से बदलती जानकारी" को याद रखने में उम्र के फ़र्क को देखा गया था, और उसमें आइटम की सिर्फ़ एक स्ट्रीम थी।

अगले पाँच दशकों तक रिसर्चर n-back को मुख्य रूप से मापने के एक टूल के तौर पर इस्तेमाल करते रहे, ताकि एक्सपेरिमेंट में वर्किंग मेमोरी पर बोझ डाला जा सके। Adrian Owen और उनके सहयोगियों की 2005 की एक मेटा-एनालिसिस में ऐसी 24 ब्रेन-इमेजिंग स्टडीज़ को जोड़ा गया जिनमें यह टास्क इस्तेमाल हुआ था।

2008 की Jaeggi स्टडी में क्या मिला?

Susanne Jaeggi, Martin Buschkuehl, John Jonides और Walter Perrig की 2008 की स्टडी PNAS में छपी। इसमें बताया गया कि dual n-back ट्रेनिंग से फ़्लूइड इंटेलिजेंस टेस्ट के स्कोर बढ़े। फ़्लूइड इंटेलिजेंस का मतलब है नई समस्याओं को सुलझाने की क्षमता, जिसे आमतौर पर मैट्रिक्स पज़ल से मापा जाता है।

पेपर के मुताबिक स्टडी का डिज़ाइन:

  • प्रतिभागी: स्वस्थ युवा वयस्क, 34 ट्रेनिंग ग्रुप में और 35 कंट्रोल ग्रुप में
  • ट्रेनिंग: हफ़्ते के कामकाजी दिनों में, रोज़ लगभग 25 मिनट
  • ग्रुप: 8, 12, 17 या 19 दिन की ट्रेनिंग
  • रफ़्तार: हर 3 सेकंड में एक स्क्वेयर और एक बोला गया अक्षर
  • टेस्ट: Raven's matrices या BOMAT, 10 मिनट की समय सीमा के साथ
  • नतीजा: ट्रेनिंग वाले ग्रुप्स में कंट्रोल ग्रुप से ज़्यादा सुधार हुआ, और ट्रेनिंग जितनी लंबी थी, बढ़त उतनी ज़्यादा

सबसे ज़्यादा ध्यान डोज़-रिस्पॉन्स पैटर्न ने खींचा, यानी ट्रेनिंग जितनी लंबी, बढ़त उतनी बड़ी। University of Michigan की प्रेस रिलीज़ में Jaeggi ने कहा, "जितनी ज़्यादा ट्रेनिंग, फ़्लूइड इंटेलिजेंस में उतना ज़्यादा सुधार।"

आलोचकों ने जल्दी ही कमियाँ ढूँढ लीं। 2009 में Moody ने बताया कि BOMAT मैट्रिक्स टेस्ट आम 45 मिनट की जगह 10 मिनट की सीमा में कराया गया था, इसलिए स्कोर शायद तर्क से ज़्यादा रफ़्तार को दिखाते हैं। कंट्रोल ग्रुप को कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी, इसलिए अंतर का कुछ हिस्सा उम्मीदों और मोटिवेशन से समझाया जा सकता है।

क्या बाद की स्टडीज़ में यही नतीजा दोहराया गया?

बाद की स्टडीज़ में n-back में बढ़त तो दोहराई गई, लेकिन इंटेलिजेंस में बढ़त कभी दिखी, कभी नहीं। Jaeggi के ग्रुप की 2010 की एक स्टडी में पाया गया कि सिर्फ़ विज़ुअल स्क्वेयर वाले single n-back से फ़्लूइड इंटेलिजेंस (Gf) में लगभग उतनी ही बढ़त हुई जितनी dual n-back से।

स्वतंत्र टीमों के नतीजे कम सकारात्मक थे। Redick और सहयोगियों (2012) और Chooi और Thompson (2012), दोनों टीमों ने लोगों को n-back की ट्रेनिंग दी और फ़्लूइड इंटेलिजेंस में कोई बढ़त नहीं पाई।

मेटा-एनालिसिस क्या कहती हैं?

मेटा-एनालिसिस एक बात पर सहमत हैं: अच्छी तरह कंट्रोल की गई स्टडीज़ में इंटेलिजेंस पर असर छोटा है या बिल्कुल नहीं। उनमें मतभेद इस पर है कि यह छोटा असर असली है या नहीं।

  • Melby-Lervåg और Hulme, 2013: वर्किंग मेमोरी ट्रेनिंग की 23 स्टडीज़ शामिल। मुख्य नतीजा: मिलते-जुलते टास्क में थोड़े समय की बढ़त, दूर के कामों तक कोई टिकाऊ ट्रांसफ़र (far transfer) नहीं।
  • Au et al., 2015: वयस्कों पर 20 n-back स्टडीज़ शामिल। मुख्य नतीजा: फ़्लूइड इंटेलिजेंस पर छोटा असर, g = 0.24, यानी लगभग 3 से 4 IQ पॉइंट।
  • Soveri et al., 2017: n-back ट्रेनिंग स्टडीज़ शामिल। मुख्य नतीजा: सबसे बड़ी बढ़त n-back टास्क के उन वर्ज़न में जिनकी ट्रेनिंग नहीं हुई थी, और दूसरे वर्किंग मेमोरी टास्क, कॉग्निटिव कंट्रोल और Gf पर छोटा असर।

Melby-Lervåg और Hulme (2013) ने सिर्फ़ n-back नहीं, बल्कि पूरी वर्किंग मेमोरी ट्रेनिंग को देखा। करीबी टास्क में बढ़त समय के साथ कम होती गई, और नॉन-वर्बल क्षमता पर मामूली असर तब गायब हो गया जब उन्होंने सिर्फ़ बेहतर डिज़ाइन वाली स्टडीज़ रखीं।

Au और सहयोगियों (2015) की टीम में Jaeggi भी थीं, और इसी टीम ने 3 से 4 IQ पॉइंट का अनुमान दिया। उनका अपना डेटा दिखाता है कि यह अनुमान विवादित क्यों है: पैसिव कंट्रोल ग्रुप वाली स्टडीज़ में, जहाँ कंट्रोल ग्रुप ने कुछ नहीं किया, औसत g = 0.44 था, जबकि एक्टिव कंट्रोल ग्रुप वाली स्टडीज़ में, जहाँ कंट्रोल ग्रुप ने कोई दूसरा टास्क किया, औसत g = 0.06 था। Dougherty और सहयोगियों (2015) के बेयेसियन री-एनालिसिस में पाया गया कि एक्टिव-कंट्रोल स्टडीज़ "कोई असर नहीं" के पक्ष में हैं, और निष्कर्ष यह निकला कि सबूत छोटी अवधि की n-back ट्रेनिंग से IQ बढ़ने का ज़्यादातर समर्थन नहीं करते।

Soveri और सहयोगियों (2017) ने नज़दीकी ट्रांसफ़र (near transfer) की ज़्यादा सख़्त परिभाषा अपनाई और सिर्फ़ n-back टास्क के बिना ट्रेनिंग वाले वर्ज़न गिने। सबसे ज़्यादा सुधार इन्हीं वर्ज़न में हुआ। इनसे आगे ट्रांसफ़र छोटा था, और लेखकों का सुझाव है कि लोग मेमोरी की क्षमता बढ़ाने से ज़्यादा उस टास्क के लिए ख़ास रणनीतियाँ सीखते हैं।

लेखक Gwern Branwen की एक स्वतंत्र मेटा-एनालिसिस में भी यही बँटवारा दिखा: कुल मिलाकर d लगभग 0.35, लेकिन एक्टिव-कंट्रोल स्टडीज़ में लगभग 0.14, और कॉन्फ़िडेंस इंटरवल में शून्य भी शामिल है।

कंट्रोल ग्रुप इतना मायने क्यों रखता है?

कंट्रोल ग्रुप इसलिए मायने रखता है क्योंकि जिन लोगों को पता होता है कि वे किसी ट्रेनिंग स्टडी में हैं, वे अक्सर बाद के टेस्ट में ज़्यादा मेहनत करते हैं। जो ग्रुप कुछ नहीं करता, उसके पास सुधार की उम्मीद करने की कोई वजह नहीं होती, इसलिए ट्रेनिंग वाला ग्रुप बेहतर दिखता है, चाहे ट्रेनिंग ने कुछ भी न बदला हो।

जब कंट्रोल ग्रुप उतने ही समय तक कोई दूसरा गेम खेलता है, तो उम्मीद का यह असर दोनों ग्रुप में होता है। n-back स्टडीज़ में ऐसी स्थिति में IQ पर असर लगभग शून्य रह जाता है। यही पैटर्न मुख्य वजह है कि आज ज़्यादातर रिसर्चर IQ में बड़ी बढ़त के दावों पर शक करते हैं।

dual n-back के असली फ़ायदे क्या हैं?

पक्का फ़ायदा एक स्किल है: कुछ आइटम दिमाग में रखना, उनकी तुलना नई जानकारी से करना और उन्हें एक स्थिर रफ़्तार से अपडेट करना। प्रैक्टिस के साथ आपका n-back लेवल बढ़ेगा, और उसका कुछ हिस्सा मिलते-जुलते टास्क तक पहुँचता है।

इस स्किल की अपनी अहमियत है। जब आप कोई तेज़ बातचीत समझते हैं या मन में जोड़ते चलते हैं, तब भी आप यही "पहले तुलना, फिर अपडेट" वाला तरीका इस्तेमाल करते हैं। तर्क करने की क्षमता या IQ में किसी भी बदलाव को एक संभावित बोनस मानें। इसी वजह से हमारे साइंस पेज पर N-Back को "B, मूल प्रक्रिया" का लेबल दिया गया है: टास्क के अंदर की बढ़त पक्की है, बाहर तक उसका असर विवादित है।

dual n-back की प्रैक्टिस कैसे करें?

2-back से शुरू करें, लगभग 80% सटीकता पार करने पर एक लेवल ऊपर जाएँ और लगभग 50% से नीचे आने पर एक लेवल नीचे आएँ। ये सीमाएँ हमारे फ़्री dual n-back टेस्ट से ली गई हैं, जहाँ हर राउंड में 20 स्कोर वाले स्टेप होते हैं और यह लगभग एक मिनट चलता है।

कुछ आदतें प्रैक्टिस को असरदार बनाती हैं:

  1. एक छोटी कतार रखें। सिर्फ़ आख़िरी N आइटम को एक लय में दोहराते हुए याद रखें, जैसे "बायाँ, ऊपर, बीच"। नया आइटम आने पर सबसे पुराना हटाएँ और सबसे नया जोड़ें।
  2. पहले तुलना करें, फिर अपडेट। पहले पूछें "क्या यह N स्टेप पहले जैसा है?", फिर नए आइटम को कतार में डालें। दोनों काम एक साथ करने से ज़्यादातर गलतियाँ होती हैं।
  3. फ़ॉल्स अलार्म से बचें। जहाँ मेल नहीं है वहाँ बटन दबाने से स्कोर कटता है, इसलिए हर स्टेप पर दबाने से स्कोर कम आता है। तभी दबाएँ जब आपको पक्का यकीन हो।
  4. एक ही लेवल पर स्कोर की तुलना करें। नया लेवल पहले कुछ राउंड में मुश्किल लगता है। अपनी प्रगति एक तय N पर आँकें।

सेशन की लंबाई के लिए स्टडीज़ कोई नियम नहीं, बस एक मोटा अंदाज़ा देती हैं। Jaeggi के प्रतिभागियों ने रोज़ लगभग 25 मिनट ट्रेनिंग की, और Au मेटा-एनालिसिस में सबसे छोटे सेशन 18.5 मिनट के थे। Au के डेटा में सेशन की संख्या से ट्रांसफ़र का अंदाज़ा नहीं लगा। अगर आपका लक्ष्य स्किल है, तो ज़्यादातर दिनों में 10 से 20 मिनट के फ़ोकस्ड राउंड एक अच्छा प्लान है। थकान से सटीकता गिरने लगे तो रुक जाएँ।

Omni Brain ऐप में यही आइडिया N-Back गेम के रूप में चलता है, जहाँ हर ब्लॉक के बाद कठिनाई अपने-आप बदलती है ताकि आप लगभग 85% सही जवाबों के आसपास रहें, इसलिए आपको लेवल ख़ुद संभालने की ज़रूरत नहीं।

dual n-back से जुड़े सवाल

क्या dual n-back से IQ बढ़ता है?

सबूत कमज़ोर हैं। एक मेटा-एनालिसिस ने 3 से 4 IQ पॉइंट का अनुमान लगाया, लेकिन जिन स्टडीज़ में कंट्रोल ग्रुप ने कोई दूसरी एक्टिविटी की, उनमें असर लगभग न के बराबर है। n-back स्कोर बेहतर होने की उम्मीद रखें, लेकिन IQ बढ़ने को अभी साबित हुई बात न मानें।

dual n-back के क्या फ़ायदे हैं?

समय के दबाव में जानकारी को याद रखने और अपडेट करने में आप बेहतर हो जाते हैं, और इसका कुछ हिस्सा मिलते-जुलते वर्किंग मेमोरी टास्क तक पहुँचता है। तर्क, पढ़ाई या काम के लिए बड़े फ़ायदे अच्छी तरह कंट्रोल की गई स्टडीज़ में साबित नहीं हुए।

रोज़ कितनी देर dual n-back खेलना चाहिए?

ज़्यादातर ट्रेनिंग स्टडीज़ में कई हफ़्तों तक रोज़ 20 से 25 मिनट की ट्रेनिंग हुई। किसी स्टडी में आदर्श अवधि नहीं मिली, और Au मेटा-एनालिसिस में ज़्यादा सेशन से ज़्यादा ट्रांसफ़र का अंदाज़ा नहीं लगा। टास्क में बेहतर होने के लिए ज़्यादातर दिनों में दस से बीस मिनट की फ़ोकस्ड प्रैक्टिस काफ़ी है।

क्या single n-back, dual n-back जितना अच्छा है?

Jaeggi के ग्रुप की 2010 की एक स्टडी में विज़ुअल स्क्वेयर वाले single n-back से फ़्लूइड इंटेलिजेंस में लगभग उतनी ही बढ़त हुई जितनी dual n-back से। अगर दो स्ट्रीम एक साथ भारी लगें, तो आदत बनाने के लिए single n-back एक अच्छी शुरुआत है।

dual n-back में अच्छा स्कोर कितना है?

हमारे dual n-back टेस्ट पर किसी लेवल में 80% से ऊपर का मतलब है कि आप अगले लेवल के लिए तैयार हैं, और 50% से नीचे का मतलब है कि एक लेवल नीचे आना चाहिए। ख़ुद की तुलना एक ही N पर करें, क्योंकि हर अगला लेवल कठिनाई में एक बड़ी छलाँग है।

रोज़ n-back की प्रैक्टिस करें

Omni Brain का N-Back गेम खेलते समय आपके हिसाब से ढलता है, और 81 और गेम याददाश्त, ध्यान, स्पीड और दूसरी स्किल्स की ट्रेनिंग देते हैं। हर गेम के साथ एक तकनीक मिलती है जिसे आप ऐप के बाहर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। फ़्री प्लान में रोज़ का एक वर्कआउट मिलता है: लगभग पाँच मिनट में तीन गेम। Omni Brain डाउनलोड करें, या अभी अपने ब्राउज़र में फ़्री dual n-back टेस्ट से शुरू करें।

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